Bishop Cottons School

कीक्ली रिपोर्टर 29 मई शिमला ।

स्कूली कचरे से बनेगी कम्पोस्ट, चंडीगढ़ की डेली डंप कंपनी ने स्कूल में ट्रॉयल के साथ किया आगाज ।।

गार्बेज कन्वर्ट इनटू कम्पोस्ट सिस्टम अपनाने वाला बिशप कॉटन स्कूल हिमाचल का पहला शिक्षण संस्थान बना।।

Bishop Cottons Schoolहिमाचल के सुप्रसिद्ध बिशप कॉटन स्कूल ने स्कूल से निकलने वाले रोजाना के कचरे के बेहतर निष्पादन के लिए स्कूल में कंपोस्टर स्थापित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वछता अभियान को सफल बनाया है । बिशप कॉटन स्कूल हेडमास्टर रॉबिंसन के प्रयासों के बाद अब स्कूल से निकलने वाला कूडा, कचरा व् फ़ूड वेस्ट मात्र 20 दिन में एक सिस्टम के तहत कंपोस्ट में तब्दील होकर स्कूली प्लांट्स और बाग़ बगीचों को मेहकाएगा ।

चंडीगढ़ की डेली डंप कम्पनी के नुमाइंदों ने बिशप कॉटन स्कूल स्टाफ और विद्यार्थियों के समक्ष हॉट पाईल कम्पोस्टिंग विद ऑर्गेंनायज माइक्रो एंड कोकोपेट सिस्टम के साथ कूड़े को कम्पोस्ट में तब्दील किये जाने की विधि को समझाते हुए इसका आगाज़ किया। इस दौरान स्कूल के तमाम स्टाफ, स्कूली छात्र और शिमला तृप्ति बिज़नेस की विशेष हस्तिया शामिल रही ।

Bishop Cottons Schoolबिशप कॉटन स्कूल हेडमास्टर रॉबिंसन ने कीक्ली से अपने विचार साझा करते हुए मोदी के स्वच्छता अभियान को सार्थक रूप में तब्दील कर पाने पर ख़ुशी व्यक्त करते हुए इसे वक्त की जरुरत करार दिया, रॉबिंसन ने कहा की इस सिस्टम से जहाँ एक तरफ कूड़े का सही निष्पादन हो सकेगा तो वहीँ स्कूली बच्चों के समक्ष शानदार सीख का मार्ग भी प्रशस्त होगा, जिससे भविष्य के नागरिक पर्यावरण रख रखाव में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर पाएंगे ।

इसके साथ ही स्कूल अध्यापक विजय महरोतरा ने की ये बहुत ही महतवपूर्ण विषय है की हम अपने गार्बेज को कैसे मैनेज करते है, स्कूल प्रबंधन काफी समय से इस पर विचार मंथन कर रहा था। उन्होंने कहा की हेडमास्टर के प्रयास काबिलेतारीफ हैं और उन्हें विशवास है की ये ट्रायल हर एक स्कूल हर एक विद्यार्थी को स्वछता और निष्पादन क्रिया का बेहतरीन उदहारण पेश करेगा।

वहीँ चंडीगढ़ डेली डंप कंपनी अधिकारी ज्योति अरोड़ा ने कीक्ली से बातचीत के दौरान कहा की लोग अपना सारा वेस्ट यहाँ वहां फेंक देते है जिससे पर्यावरण प्रभावित होता है, इसी को देखते हुए कंपनी ने कंपोस्टर सिस्टम अपनाने पर बल देते हुए देश के कई राज्यों में इस दिशा में कदम बढ़ाया है,और कम खर्च के साथ इसे अपनाने को लेकर स्कूलों सहित लोकल लेवल पर जागरूकता फ़ैलाने का प्रयास किया है, जो लगातार जारी है ।

ज्योति ने बताया की कोई भी संस्थान इस प्रोजेक्ट पर दो से अढ़ाई लाख का खर्च कर न केवल कूड़े का सही निष्पादन कर सकता है बल्कि तयार होने वाली कम्पोस्ट से पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे सकता है। ज्योति ने बताया की बिना बिजली से चलने वाले इस कंपोस्टर में प्लास्टिक, गत्ते, पिन, कांच को अलग कर बाकि रोजाना के 90 प्रतिशत वेस्ट को मात्र 20 दिन में खाद में तब्दील किया जाता है।

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