Sahaj Sabharwal, Delhi Public School, Jammu

लो आ गया नया ज़माना,
स्वच्छ भारत बन गया है एक बहाना ।
क्या भारत की स्वच्छता का इरादा,
टूट रहा है यह स्वच्छ भारत का वादा ।
सैलानी हैं आते यहाँ,
दिखती है गंदगी देखें जहाँ  ।
क्या वैष्णो देवी की पवित्र पहाड़ियां,
लिपटी जो रहतीं  हैं,  बर्फीली  साड़ियां ।
एवं  मनुष्य  की अपवित्रता  का साथ,
दया करो हम पर तो भैरवनाथ  ।
इसी गंदगी का करना है अंत,
तभी काम करेंगी भक्ति और मेलों में प्रभु या संत ।

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